23 मार्च (March) शहीद दिवस: भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव शहीद दिवस

23 मार्च (March) 1931 की रात भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की (87 पूर्ण तिथि),  देश-भक्ति को अपराध की संज्ञा देकर फाँसी पर लटका दिया गया।   मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह तय की गई थी लेकिन किसी बड़े जनाक्रोश की आशंका से डरी हुई अँग्रेज़ सरकार (British Government) ने 23 मार्च की रात्रि को ही इन क्रांति-वीरों की जीवनलीला समाप्त कर दी। रात के अँधेरे में ही सतलुज नदी के किनारे इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

'लाहौर षड़यंत्र' के मुक़दमे में भगतसिंह को फाँसी की सज़ा दी गई थी तथा केवल 24 वर्ष की आयु में ही, 23 मार्च 1931 की रात में उन्होंने हँसते-हँसते, 'इंकलाब जिंदाबाद' (Inquilab Zindabad) के नारे लगाते हुए फाँसी के फंदे पर लटका दिया था।

23 March

भगतसिंह
पुरा नाम: भगतसिंह संधु
पिता का नाम: किशनसिंह
माता का नाम: विधावतीजी
जन्म  - 28 सितंबर 1930
जन्म स्थल - ल्यालपुर , पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान)

राजगुरु
पुरानाम: शिवराम राजगुरु
पिताका नाम: हरिनारायण
माता का नाम: पार्वती
जन्म - 24 अगस्त 1908
जन्म स्थल - खेड गाम, बोम्बे

सुखदेव
पुरा नाम: सुखदेव थापर
पिता का नाम: रामलाल
माता का नाम: राल्लिदेवी
जन्म - 15 में 1907
जन्म स्थल - लिधियाणा, पंजाब


भगतसिंह  युवाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए। वे देश के समस्त शहीदों के सिरमौर थे।

भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव भारत के वे सच्चे सपूत थे, जिन्होंने अपनी देशभक्ति और देशप्रेम को अपने प्राणों से भी अधिक महत्व दिया और मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर कर गए। 23 मार्च (March) यानि, देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस। यह दिवस न केवल देश के प्रति सम्मान और हिंदुस्तानी होने वा गौरव का अनुभव कराता है, बल्कि वीर सपूतों के बलिदान को भीगे मन से श्रृद्धांजलि देता है।

उन अमर क्रांतिकारियों के बारे में आम मनुष्य की वैचारिक टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं है। उनके उज्ज्वल चरित्रों को बस याद किया जा सकता है कि ऐसे मानव भी इस दुनिया में हुए हैं, जिनके आचरण किंवदंति हैं। भगतसिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उनके बाद अब किसी के लिए संभव न होगी।

भगतसिंह का जन्म 28 सितंबर (December) 1907 को हुआ था और 23 मार्च (March) 1931 को शाम 7.23 पर भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को फांसी दे दी गई। 

शहीद सुखदेव : सुखदेव का जन्म 15 मई (May), 1907 को पंजाब को लायलपुर पाकिस्तान में हुआ। भगतसिंह और सुखदेव के परिवार लायलपुर में पास-पास ही रहने से इन दोनों वीरों में गहरी दोस्ती थी, साथ ही दोनों लाहौर नेशनल कॉलेज के छात्र थे। सांडर्स हत्याकांड में इन्होंने भगतसिंह तथा राजगुरु का साथ दिया था।

शहीद राजगुरु : 24 अगस्त (August), 1908 को पुणे जिले के खेड़ा में राजगुरु का जन्म हुआ। शिवाजी की छापामार शैली के प्रशंसक राजगुरु लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से भी प्रभावित थे।

पुलिस की बर्बर पिटाई से लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए राजगुरु ने 19 दिसंबर (December), 1928 को भगत सिंह के साथ मिलकर लाहौर में अंग्रेज सहायक पुलिस अधीक्षक जेपी सांडर्स को गोली मार दी थी और खुद ही गिरफ्तार हो गए थे।

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